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Martial Arts in India Top Most Famous

Top Most Famous martial arts in india

 

Martial Arts In India - UPSC NOTES - Amazingworldraghav

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भारत , विविध संस्कृतियों तथा प्रजातियों वाली भूमि है , जो की प्राचीन काल से ही अपने मार्शल आर्ट्स की विविधता के लिए जनि जाती है। पूर्व में युद्ध के लिए उपयोग होने वाले इन कला प्ररूपों को आज सामान्य रूप से , शारीरिक स्वास्थ्य लाभ के लिए तथा धर्मिक संस्कार के रूप में या आत्मरक्षा के  एक साधन के रूप में , प्रयुक्त किया जाता है। मार्शल आर्ट का शाब्दिक अर्थ है ' युद्ध  छेड़ने से संबद्ध कला '। ब्रिटिश शासन के दौरान इनमे से कुछ कला रूपों पर प्रतिबंध लगा दिया गया , भारत में मार्शल आर्ट्स के कुछ लोकप्रिय प्रकारों पर विचार - विमर्श किया गया है। 

कलारीपयट्टू (Kalaripayattu Martial Arts In India)

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Source :- istockphoto


यह भारत में सबसे पुराने मार्शल आर्ट्स में से एक है। यद्यपि इसका अभ्यास दक्षिणी भारत के अधिकतर भागों में होता था , परन्तु इसकी उत्पत्ति लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व केरल राज्य में हुई थी। कलारी , एक मलयालम शब्द है , जिसका अर्थ है एक विशिष्ट प्रकार का विद्यालय / व्यायामशाला / प्रशिक्षण कक्ष , जहाँ मार्शल आर्ट्स का अभ्यास किया जाता था या सिखाया जाता था।
इस कला रूप में नकली दूंदू युद्ध (सशस्त्र और नि:शस्त्र संघर्ष ) और शारीरिक अभ्यास सम्मिलित है। सामान्य तौर पर , किसी ढोल - बाजे या गीत से रहित इस कला का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू , इसकी युद्ध शैली है। कलारीपट्टू की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता फुटवर्क (Footwork) है; इसमें लात मारने , वार करने और हथियार आधरित अभ्यास सम्मिलित है। यहाँ तक की महिलाएँ भी इस कला का अभ्यास करती है। कलारीपट्टू की जड़े अभी भी पारंपरिक धार्मिक संस्कारो और उत्सवों में दिखायी देती है।
कलारीपट्टू में कई तकनीकों और पहलुओं का समावेश है। उनमे से कुछ है : उझिचिल या गिंगली तेल से मालिश , ओट्टा ( एक ' S ' की आकृति की लाठी ), मैपयट्टु या शरीरिक व्यायाम , कोलथरिपयट्टु या लड़ाई के लिए लकड़ी के हथियारों का उपयोग , अंगठारी या धातु के तेज हथियारों और कोल्थारी की छड़ियों का उपयोग , वेरुमकई या नंगे हाथ से लड़ाई।

 

सिलम्बम (Silambam Martial Arts In India)


सिलम्बम , एक प्रकार की लाठी चलाने या पटेबाजी की कला है , जो कि तमिलनाडु की एक आधुनिक और वैज्ञानिक मार्शल आर्ट है। पण्ड्य , चोल और चेर वंश के राजाओं ने अपने शासनकाल के दौरान इसे बढ़ावा दिया। विदेशी व्यापारियों को सिलम्बम लाठियों , पर्ल , तलवार और कवच के संदर्भ दूसरी ईस्वी के तमिल साहित्य शिलप्पदिकारम में देखने को मिलते है। यह द्वितीय शताब्दी ईस्वी की रचना है। सिलम्बम बॉस की लाठी , रोम , यूनान और मिस्र के व्यापारियों और यात्रियों के मध्य सबसे लोकप्रिय व्यापारिक वक्तुओं में से एक थी। ऐसा माना जाता है कि यह कला अपने उत्पत्ति राज्य से मलेशिया पहुँची , यहाँ पर यह आत्मरक्षा की विधि के अलावा एक प्रसिद्ध खेल के रूप में परिणत हो गयी।
लम्बी-लाठी का उपयोग नक़ली लड़ाई और आत्मरक्षा दोनों के लिए किया जाता था।
सिलम्बम में विभिन्न प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया जाता है , जिसमें सम्मिलित है पैरों की तेज चाल , लाठी चलाने के लिए दोनों हाथों का उपयोग , शरीर के विभिन्न स्तरों ( सिर , कन्धा , कूल्हा , और पैर के स्तर ) पर बल , वेग और सटीकता को विकसित करने के लिए तथा प्रवीणता प्राप्त करने के लिए कटाक्ष , कटाव , वार और घुमाव का उपयोग। खिलाडी को सर्प प्रहार , बन्दर प्रहार , और बाज प्रहार , जैसे प्रहारो का उपयोग करके , एक अदम्य झुण्ड को छिन्न - भिन्न करने में और उनके द्वारा फेंके गये पत्थरों का मार्ग मोड़ने में भी प्रशिक्षित होना चाहिए।

 

इन्बुआई कुश्ती ( Inbuan Wrestling Martial Arts In India)

 

मिज़ोरम के इस देशी मार्शल आर्ट , इन्बुआई कुश्ती का उद्द्भव मान्यता के अनुसार 1750 ईस्वी में हुआ था। इसमें बहुत कड़े नियम है , जिसके अंतर्गत वृत्ताकार क्षेत्र से बाहर पैर रखने ,लात चलाने और घुटने मोड़ने की मनाही है। इस खेल में विजय प्राप्त करने के लिए नियमों का कड़ाई के पालन करते हुए प्रतिदुंदु के पैरों को उठाना पड़ता है। इसमें पहलवानों द्वारा बेल्ट ( कमर में पहने गये ) को पकड़ना भी सम्मिलित है।

 

चेइबी गद -गा ( Cheibi Gad-ga Martial Arts In India )

 

मणिपुर के सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट्स में से एक , चेइबी गद-गा के अंतर्गत एक तलवार और एक ढाल का उपयोग करके युद्ध किया जाता है। अब इसमें संशोधन करके तलवार के स्थान पर एक मुलायम चर्म आवरण युक्त छड़ी और एक चर्म निर्मित ढाल का उपयोग किया जाने लगा है। प्रतियोगिता एक सपाट सतह पर 7 मीटर व्यास वाले एक वृत्ताकार क्षेत्र में होती है। इस वृत्ताकार क्षेत्र के भीतर , हर दो मीटर की दूरी दो रेखाएँ होती है। ' चेइबी ' छड़ी की लम्बाई २ से २.५ फ़ीट के बीच होती है , जबकि ढाल का व्यास प्रायः १ मीटर होता है। इस प्रतियोगिता में विजय की प्राप्ति एक दुदुं के दौरान अर्जित किये जाने वाले अंको के आधार पर होती है। अंक , कौशल और शारीरिक बल के आधार पर प्रदान किये जाते है।

 

Summary of Martial Arts in India

  • युद्ध कला - ' युद्ध करने से जुडी कला '।
  • कलारीपयट्टू - तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास केरल में उत्पन्न हुआ था - इसमें कई तकनीकें शामिल हैं - ब्रिटिश शासन के दौरान प्रतिबंधित रहा।
  • सिलंबम - तमिलनाडु की आधुनिक और वैज्ञानिक युद्ध कला - माना जाता है कि इस कला का विस्तार मलेशिया तक हो गया है - नक़ली लड़ाई और आत्मरक्षा दोनों के लिए उपयोग किया जाता हैं।
  • चेइबी गद - गा - मणिपुर की प्राचीन युद्ध कला - इसमें तलवार और ढाल का उपयोग कर लड़ना शामिल होता है।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न -

भारत की संस्कृति और परंपरा के अनुसार , ' कलारीपयट्टू ' क्या है ?

(a) यह दक्षिण भारत के कुछ भागों में अभी भी प्रचलित शेव धर्म का एक प्राचीन भक्ति पंथ है।
(b) यह दक्षिण भारत के कुछ भागों में एक प्राचीन मार्शल आर्ट्स और एक जीवन्त परंपरा है।
(c) यह कोरोमंडल क्षेत्र के दक्षिणी भाग में अभी भी मिलने वाली एक प्राचीन शैली वाली काँसे और पीतल की कलाकृति है।
(d) यह मालाबार के उत्तरी भाग में नृत्य और नाटक का एक प्राचीन रूप और एक जीवन्त परंपरा है।

 

Note:-  इस प्रश्न का उत्तर आप हमारे टेलीग्राम चैनल (Amazing World With Raghav) पर दे सकते है।